माता-पिता को कांवड़ पर बैठाकर गाजियाबाद से पैदल हरिद्वार पहुंचा बेटा, दर्द छुपाने के लिए दोनों की आंखों पर बांधी पट्टी

14 जुलाई 2022 से सावन का पावन पर्व शुरू हो चुका है. भारी मात्रा में श्रद्धालु भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए जाते हैं. कांवड़ मेला यात्रा धर्म, आस्था, श्रद्धा, विश्वास, भक्ति संग आध्यात्मिक शक्ति के मिलन का एक पर्व है जिसे सावन के पावन माह में मनाया जाता है. सावन मास में 2 सप्ताह चलने वाली यात्रा में शिवभक्त धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कांवड़ में गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक जाते हैं. इसी क्रम में अपने माता-पिता को कांवड़ पर बैठा कर गाजियाबाद से विकास गहलोत पैदल हरिद्वार पहुंचे हैं जिनकी चर्चा चारों तरफ हो रही है.

इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने अपने माता पिता से अपना दर्द छिपाने के लिए उनके दोनों आंखों पर पट्टी बांधी है. चिलचिलाती धूप और सैकड़ों किलोमीटर के सफर की परवाह किए बगैर विकास अपने माता पिता को कांवड़ पर बैठाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए निकले हैं. विकास इसी तरह सैकड़ों किलोमीटर का सफर पैदल ही तय कर रहे हैं.

यात्रा के दौरान उनके माता-पिता उनका दर्द देख कर विचलित ना हो इसलिए विकास में अपने माता पिता की आंखों पर कपड़ा बांध दिया है. विकास का कहना है कि उनके माता-पिता की कावड़ यात्रा की इच्छा थी लेकिन उम्र के इस पड़ाव में पहुंचने के बाद उनका जाना मुश्किल था. इसलिए विकास के मन में काफी पहले से अपने माता पिता को कावड़ यात्रा कराने की इच्छा थी .

2 वर्ष बाद विकास अपनी माता-पिता की इच्छा पूर्ण करने के लिए निकल गए. वही चिलचिलाती धूप और बारिश सैकड़ों किलोमीटर का सफर विकास की हिम्मत और मातृ पितृ भक्ति की हर कोई दिल से तारीफ कर रहा है.

कांवर ले जाने के लिए धार्मिक मान्यताओं का विशेष ध्यान रखा जाता है. शुभ मुहूर्त में कांवड़ तो गंगा जल में स्नान करा कर पूजा अर्चना करने के बाद ही इसे उठाया जाता है. कांवड़ ले जाते वक्त पूर्ण रूप से ब्रह्माचर्य का पालन करना आवश्यक है इतना ही नहीं बल्कि इन्हें कई प्रकार के मार्ग में निषेधो से बचना भी पड़ता है.

Read Also: