एक ऐसा संप्रदाय जिसके रोम-रोम में बसते हैं “भगवान श्री राम”, शरीर के हर हिस्से पर लिखवाते हैं राम का नाम

हमारे हिंदू धर्म में राम नाम के प्रति एक ऐसी आस्था है कि न मंदिर है ना मूरत है फिर भी कण-कण में प्रभु श्री राम बसते हैं. आज हम आपको एक ऐसे संप्रदाय के बारे में बताएंगे जिनकी प्रभु श्री राम के प्रति एक अनोखी भक्ति और आस्था है और यह अपनी भक्ति से एक अलग पहचान बना चुके हैं. छत्तीसगढ़ के रामनामी संप्रदाय के लिए राम का नाम उनकी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

यह एक ऐसी संस्कृति है जिसमें राम नाम को कण-कण में बसाने की परंपरा है. इसी परंपरा के तहत इस संप्रदाय से जुड़े लोग अपने पूरे शरीर पर राम राम का गुदना अर्थात टैटू बनवाते हैं तथा राम नाम लिखे कपड़े धारण करते हैं. घरों की दीवारों पर भी राम-राम लिख पाते हैं यहां तक कि आपस में एक दूसरे का अभिवादन भी राम-राम कह कर ही करते हैं.

ऐसा माना जाता है कि इस संप्रदाय की आस्था ना तो अयोध्या के राम में है और ना ही मंदिरों में रखे जाने वाली राम की मूर्तियों में.. इनका राम हर मनुष्य में पेड़ पौधों में जीव जंतु में और समस्त प्रकृति में समाया हुआ है. रामनवमी समाज के लोगों का मानना है कि मंदिरों पर स्वर्णो ने कब्जा कर लिया और हमें राम से दूर करने की कोशिश की गई. हमने मंदिरों में जाना छोड़ दिया हमने मूर्तियों को छोड़ दिया.

अपने पूरे शरीर में राम नाम को गुदवा के राम के प्रति समर्पित हो गए. हमारे शरीर में कण-कण में राम बसे हुए हैं. अब हमें राम से कौन दूर कर सकता है. मेरे राम तो यही है मेरे मित्र मेरे परिजन.. इन सक्रदाय में किसी भी धर्म वर्ण लिंग या जाति का व्यक्ति दीक्षा ले सकता है. रहन-सहन और बातचीत में राम नाम का अधिकतम उपयोग करने वाले रामनामी के लिए शरीर पर राम नाम गोदवाना बेहद अनिवार्य होता है.

शरीर के विभिन्न हिस्सों में राम नाम लिखवाने के कारण इस सब संप्रदायिक से जुड़े लोग अलग से ही पहचान में आ जाते हैं. सिर से लेकर पैर तक यहां तक कि जीभ, तलवे में भी अस्थाई रूप से राम नाम को गुदवाते हैं. कारण यह है कि रामनामी संप्रदाय के नई पीढ़ी का राम नाम को गुदवाने की अपनी परंपरा से दूर होते दिखाई दे रहे हैं.

नई पीढ़ी मात्र ललाट या हाथ पर या एक दो बार राम नाम को दबाकर किसी तरह अपनी परंपरा का निर्वाह कर लेना चाह रही है. आपको बता दें कि साल में एक बार लगने वाली रामनवमी भजन मेले में संप्रदाय के लोग मिलते बैठते हैं जहां नए लोगों को दीक्षित किया जाता है लेकिन अब मेले में दीक्षा लेने वालों की संख्या धीरे-धीरे लगातार कम होती दिखाई दे रही है. रामनवमी समाज के रीति रिवाज में टूट रहे हैं. बच्चे तो अब शरीर पर राम नाम लिखवाने से भी डरते हैं.