मौ’त को करीब से देखकर टूट गए थे संजय मिश्रा, फिल्मी दुनिया को छोड़ धाबे पर‌ मैगी बेचने लगे थे, फिर इस डायरेक्टर ने बदली किस्मत

बॉलीवुड की मशहूर कॉमिक अभिनेता संजय मिश्रा की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उन्होंने बहुत स्ट्रगल के बाद फिल्म इंडस्ट्री में इतना बड़ा नाम स्थापित किया है। बॉलीवुड के कामयाब कलाकारों में गिने जाने वाले संजय मिश्रा की जिंदगी में एक ऐसा दिन भी आया था जब वह फिल्मी दुनिया को अलविदा कह कर ढाबे पर मैगी बेचने लगे थे। आज के लेख में हम आपको बताएंगे उनकी कहानी!

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बिल्कुल करीब से देखी थी मौत-: एक इंटरव्यू में संजय मिश्रा ने बताया कि एक ऐसा समय था कि जब वह काफी बीमार रहने लगे थे। डॉक्टर को जब चेक कराया था पता चला उनके पेट में इंफेक्शन है। यह बीमारी इतनी खतरनाक स्थिति में पहुंच गई थी कि संजय मिश्रा मृत्यु शैया तक जा पहुंचे थे। ऐसे में उनके पिता ने उनके मनोबल को बढ़ाया।

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लेकिन कुछ दिनों बाद खुद उनके पिताजी भी चल बसे। पिताजी की मृत्यु ने संजय को बिल्कुल तोड़ कर रख दिया। उनकी जिंदगी बेजान सी हो गई। ठीक होने के बाद संजय मिश्रा शांति की तलाश में गंगोत्री ऋषिकेश जा पहुंचे। वहां उन्होंने एक बूढ़े व्यक्ति के होटल में आमलेट और मैगी बनाने का काम शुरू कर दिया.

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धोने पड़ते थे रोज 50 कप-: अपनी स्टोरी बताते हुए संजय मिश्रा ने बताया कि उस ढाबे के मालिक ने उनके सामने यह शर्त रखी थी कि उन्हें डेली 50 कप धोने पड़ेंगे। तब जाकर उन्हें डेढ़ सौ रुपए मिलेंगे। उस समय यह राशि तो उन्हें बहुत कम लगी लेकिन फिर भी उन्होंने जीवन यापन के लिए वह काम स्वीकार कर लिया। इस काम करने से पहले संजय मिश्रा बॉलीवुड की कई फिल्मों में काम कर चुके थे। उन्होंने शाहरूख खान के साथ 1995 “ओ डार्लिंग यह है इंडिया” फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी। लेकिन 1998 में आई फिल्म सत्या ने उनके करियर को चार चांद लगा दिए।

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रोहित शेट्टी ने कराई सिनेमा जगत में वापसी-: मशहूर फिल्म मेकर रोहित शेट्टी ने अपने फिल्म ऑल द बेस्ट के लिए संजय मिश्रा को पहले से ही चूज कर रखा था। संजय मिश्रा को ढूंढते ढूंढते वह भी ऋषिकेश जा पहुंचे और उन्होंने संजय मिश्रा को फिल्म में काम करने का ऑफर दिया। पहले संजय तो नहीं माने लेकिन रोहित शेट्टी की जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा और वह एक बार फ़िर फ़िल्म इंडस्ट्री की तरफ मुड़ गए। उसके बाद संजय मिश्रा ने बॉलीवुड को कई सुपरहिट फिल्में दी।

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