इस साधु ने दुनिया में शांति कायम करने के लिए 45 सालों से किया है अपना एक हाथ ऊपर, सच्चाई जान आश्चर्य हो जाएंगे आप

हमारे समाज में बहुत से ऐसे लोग हैं जो अपना खुद का जीवन दाव पर लगाकर समाज की सेवा करना ही अपने जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य मानते हैं. वह अपने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं चाहे उनके जीवन में कितनी भी मुसीबतें क्यों ना आए वो डटकर उस मुसीबतों का सामना करते हैं. आज मैं आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने समाज सेवा के लिए कुछ ऐसा कदम उठाया है जिससे जानने के बाद आप हैरान रह जाएंगे.

आज जहां लोग दुनिया भर में शांति के समझौते को लेकर तरह तरह के प्रयास कर रहे हैं. वही आज हम आपको एक ऐसे साधु के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने पूरी दुनिया में शांति कायम करने के लिए एक ऐसा कदम उठाया है जिसके बाद भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में उनके चर्चे हो रहे हैं. और वह अपने इस निर्णय की वजह से देश और दुनिया में काफी लोकप्रियता हासिल की है.

हम जिस शक्स की बात कर रहे हैं उनका नाम अमर भारती है और इन्होंने जो अनोखा कारनामा किया है वह हर किसी को आश्चर्यचकित कर रही है. साधु अमर भारती जी ने लगभग 45 वर्षों से अपना एक हाथ हवा में उठाया हुआ है जिसे उन्होंने कभी भी नीचे नहीं किया. आपको बता दें अमर भारती के अपने इष्ट भगवान शिव को मानते हैं और उन्हीं को मानते हुए इन्होंने यह कारनामा किया है.

अपने इस अनोखे कारनामे को अंजाम देने से पहले साधु अमर भारती जी बड़ी साधारण जिंदगी जी रहे थे एक आम इंसान की तरह उनका भी अपना घर परिवार था जिनके साथ यह बड़ी खुशी से अपनी जिंदगी व्यतीत कर रहे थे. परिवार में उनकी धर्मपत्नी है और उनके तीन बच्चे भी हैं लेकिन फिर ना जाने कैसे अमर भारती जी के मन में समाज के कल्याण की भावना जागृत हुई और उन्होंने ऐसा फैसला लिया तब उनके साथ उनका पूरा परिवार उनके साथ खड़ा था.

लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया उनका परिवार उनके इस फैसले से नाराज होता चला गया और आज उनका परिवार और उनके बच्चे सभी पीछे छोड़ चुके हैं और साधु अमर भारतीय जी अपने फैसले पर डटे रहें. अपने ईस्ट भगवान शिव को मानते हुए भारत के सड़कों पर साधु के वेश में घूमते रहते हैं. साधु अमर भारती को साल 1973 में एक सपना आया और उन्होंने अपनी जिंदगी की सभी सुख संसाधनों को छोड़कर एक साधु के वेश को चुन लिया और आज वह इसी रास्ते पर चल रहे हैं.

आज साधु अमर भारती अपने साथ केवल एक त्रिशूल रखते हैं जो कि धातु का बना हुआ है. आज इतने सालों के बाद भी साधु अमर भारती जी का हाथ बिल्कुल भी सामान नहीं रहा और अब वह चाहकर भी अपने हाथ को नीचे नहीं कर सकते और ना ही किसी काम में इस्तेमाल कर सकते हैं. क्योंकि आज उनके हाथों पर गुरुत्वाकर्षण बल भी काम नहीं करता है जो बेहद हैरानी कर देने वाली बात है.