पुरातत्व विभाग को मिले रामायण काल के अवशेष, करीब 1750000 साल पुराने हैं यह अवशेष, बता रहे हैं रामायण की वास्तविकता

सतत सनातन हिंदू धर्म का इतिहास कई युग पुराना है। हर युग में कुछ ना कुछ मानव जीवन को सही राह दिखाने के लिए ग्रंथ लिखे गए।लेकिन फिर भी कुछ लोग उन्हें सही नहीं मानते और प्रमाण की मांग करते हैं। आज के लेख में हम आपको बताएंगे रामायण काल के वह 8 प्रमाण जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे..

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रामेश्वरम में श्री राम सेतु होना-: श्री रामायण का सबसे बड़ा प्रमाण है कि रामेश्वरम में आज भी भगवान श्री राम की वानर सेना द्वारा निर्मित किया गया समुद्र पर पुल के अवशेष आज भी है। हैरत की बात यह है की विशेष पत्थरों से निर्मित काफ़ी जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है। लेकिन अभी भी इसके पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। इसकी पुष्टि खुद अमेरिकन स्पेस एजेंसी नासा ने की थी..

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हनुमान जी ने धराशायी किया था रावण का हाथी-: राक्षस राज रावण ने अपनी अभेद्य नगरी लंका की सुरक्षा के बड़े चाक-चौबंद प्रबंध किए थे।उसने अपने मुख्य द्वार की रखवाली के लिए कहीं विशालकाय हाथी नियुक्त किए थे। खुदाई के दौरान मिले इन अवशेषों से पता चला है कि यह अवश्य उन्हीं विशालकाय हाथियों के हैं जो आज के अपेक्षा करीब 10 गुना ज्यादा बड़ा हुआ करते थे। इन्हें हनुमान जी ने धराशायी किया था।

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पर्वत पर मौजूद है निशान-: श्री राम और रावण के बीच हुए संग्राम में जब श्री लक्ष्मण बाणों से चोट खाकर मूर्छित हो गए थे तब हनुमान जी उनकी रक्षा के लिए जड़ी बूटी लाने द्रोण पर्वत पर गए थे। जब वह वहां पहुंचे तो जड़ी-बूटी को पहचान नहीं पाए उन्होंने जड़ी-बूटी समेत पूरे पहाड़ को ही उठा लिया और लंका ले आए थे। इस्तेमाल के बाद पुनः उसी जगह पर रख आए थे। द्रोणागिरी पर्वत पर आज भी वह निशान मौजूद है जहां से हनुमान जी ने उसे तोड़ा था. श्रीलंका में जिस स्थान पर श्री लक्ष्मण जी को संजीवनी बूटी दी गई थी वहां आज भी कुछ जड़ी बूटियों पाई जाती है जो दुनिया के किसी हिस्से में नहीं मिलती।

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आज भी मौजूद है अशोक वाटिका-: माता सीता का हरण करने के बाद राक्षस राज रावण ने सीता जी को अपने प्रिय अशोक वाटिका में रखा था। यह वाटिका आज भी मौजूद है। इसे (Hakgala Botanical Garden And Reserch Center) के नाम से जाना है। जब हनुमान जी ने लंका को जला दिया था रावण ने उन से डरकर सीता जी को अशोक वाटिका से हटाकर कोंडा कट्टू गाला में रखवा दिया था। इस स्थान पर पुरातत्व विभाग को कई सारी गुफाएं मिली है जो रावण के महल तक जाती थी।

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