दोस्ती की मिसाल बने 94 वर्ष के प्रयाग, 92 साल की बीमार मित्र की खबर सुन दौड़ चले आए, साथ में लड़े है तीन युद्ध

मां बेटे के रिश्ते के बाद दोस्ती का रिश्ता सबसे मजबूत माना जाता है. रिश्ता एक भरोसेमंद रिश्ता होता है. दोस्ती कभी भी उम्र, अमीरी, गरीबी को ध्यान में रखकर नहीं की जाती है. दोस्त अपने परिवार के साथ अपनी समस्याओं को खुलकर कह नहीं पाता लेकिन वह अपने मित्र को आराम से अपने दिल की बात बता सकता है. जब हम अपने जीवन के उत्साह, उल्लास, खुशी तथा जिंदगी के कठिन समय को एक दूसरे के साथ बांट सके वही व्यक्ति सच्चा मित्र कहलाता है.

आप सब ने मित्रता के ऊपर कई सारे किस्से सुने होंगे. आज हम आपको ऐसे ही 2 दोस्त की दोस्ती के बारे में बताने जा रहा है जो कि जिला अस्पताल बागेश्वर में देखने को मिला है. इस अनूठी दोस्ती के दोनों ही दोस्त 90 साल से ज्यादा की उम्र के हैं. दरअसल यह अनूठी कहानी 2 दोस्त प्रयाग दत्त पाठक (94) और हिम्मत सिंह (92) की है. प्रयाग दत्त पाठक कपकोट के दूरस्थ गांव चुचेर के गिजमौटा तोक के निवासी हैं तो वही हिम्मत सिंह बहुली के निवासी यह दोनों ही दोस्त पेरा रेजीमेंट में तैनात थे.

एक ही रेजिडेंट में तैनाती और एक ही जिले से होने के चलते इन दोनों की दोस्ती और भी गहरी होती चली गई. सेवानिवृत्त होने के पश्चात भी इन दोनों की दोस्ती जारी रही. बता दे दोनों मित्रों ने 1962 में हुए भारत चीन युद्ध में भागीदारी की. इस दौरान वह अरुणाचल प्रदेश के अलौग सेक्टर में तैनात रहे. सेवानिवृत्त होने के बाद प्रयाग दत्त पाठक और हिम्मत सिंह एक दूसरे से अकसर मिला करते थे लेकिन बढ़ती उम्र के चलते हैं पिछले 10 वर्षों से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई थी..

इसी बीच हिम्मत सिंह की सेहत खराब हो गई और उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया. जब उनके मित्र प्रयाग दत्त पाठक को अपने दोस्त के बीमारी के बारे में अपने आप को रोक नहीं पाए और वह तुरंत बुधवार को अपने बेटे शिक्षक नवीन चंद्र पाठक के साथ अपने मित्र का हाल-चाल लेने के लिए अस्पताल पहुंच गए. मित्र का हाल-चाल जानने के लिए उन्होंने करीब 60 किलोमीटर का सफर तय किया. वहां लाठी से बागेश्वर टैक्सी की मदद से पहुंचे और जिला अस्पताल जाकर अपने मित्र के स्वास्थ्य की जानकारी ली. 10 साल के बाद दोनों मित्रों की मुलाकात हुई तो दोनों ने अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाया.

होठों से अल्फाज नहीं निकल पा रहे थे लेकिन दोनों दोस्तों की आंखों से लगातार आंसुओं की धारा बह रही थी और इनकी अनूठी मित्रता कि सारी कहानी बयां कर रहे थे. दोनों ही मित्र काफी देर तक एक दूसरे का हाथ थामें.. आंसू बहाते रहे.. दोनों दोस्त बातचीत के दौरान सेना, युद्ध सेहत और घर परिवार की ढेर सारी बातें करते रहे. यह नजारा देख वहां खड़े लोग भी भावुक हो गए और इनकी दोस्ती की मिशाल देने लगे.