महाराष्ट्र की मैराथॉन लेडीः पति की जान बचाने के लिए साड़ी में 60 KM दौड़ी लता खरे

हमारे देश में मोटापा एक महामारी की तरह फैलता जा रहा है। कई लोग अपने अनियमित दिनचर्या और तली भुनी हुई चीजें खाने से मोटापे का शिकार हो रहे हैं। उसके बाद लोग वर्कआउट करने जिम जाते हैं जिसमें वह बमुश्किल 10 से 15 मिनट रनिंग कर पाते हैं। मैराथन की तो बात ही अलग है। आज के आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि कैसे एक 60 वर्षीय महिला ने अपने पति की जिंदगी बचाने के लिए करीब 3 किलोमीटर की मैराथन दौड़ लगाई।

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मुश्किलों से लड़ने को लगाई दौड़-: यह घटना महाराष्ट्र की है। महाराष्ट्र के गांव लातूर की रहने वाली लता खरे की आर्थिक स्थिति कुछ ठीक नहीं थी। फिर एक दिन अचानक उनके पति की तबीयत खराब हो गई। अस्पताल ले जाने पर पता चला कि एमआरआई स्कैन करवाना पड़ेगा जिसके लिए ₹5000 की जरूरत पड़ेगी। लता के पास इतने पैसे नहीं थे इसलिए लता बिल्कुल निराश हो गई। फिर गांव की ही एक आदमी ने उसे बताया कि पड़ोस के गांव में एक मैराथन हो रही है। तुम उस में भाग लो। जीतने वाले को ₹5000 इनाम मिलेंगे।

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लता ने पूरा किया 3 किलोमीटर का मैराथन-: लता खरे को मैराथन के बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। लेकिन इनाम के बदले मिले पैसों से पति की जिंदगी बच जाएगी यही सोचकर लता ने मैराथन में हिस्सा लिया। मैराथन दौड़ते दौड़ते बीच में उनकी चप्पल भी टूट गई लेकिन लता खरे ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने रिकॉर्ड समय में 3 किलोमीटर का मैराथन जीत लिया और इनाम के बदले पैसों से उन्होंने अपने पति का इलाज कराया।

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अभी भी लेती हैं मैराथन में हिस्सा-: पहले मैराथन में मिली जीत से उत्साहित लता खरे ने उसके बाद आसपास के इलाकों में होने वाली हर मैराथन में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। वह कभी साड़ी पहनकर या कभी नंगे पांव ही दौड़ती हैं। उनकी उम्र करीब 65 वर्ष है लेकिन आज भी वह मैराथन मैं दौड़ने से हिचकती नहीं है। उनके जिंदगी पर आधारित एक मराठी फिल्म भी बन चुकी है जिसका नाम है “लता भगवान खरे”।वाकई लता खरे की यह कहानी काफी लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनेगी।

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