हिमा दास: बचपन में नंगे पैर दौड़कर जीते गोल्ड मेडल, कड़ी मेहनत के बदौलत बनी असम की DSP

हमारी दुनिया खिलाड़ियों से भरी पड़ी है. हमारे भारत देश में बहुत से ऐसे खिलाड़ी हैं जो भारत को गोल्ड मेडल दिलाने के लिए जी जान तक लगा देते हैं. ऐसे ही कहावतो की एक बेशुमार मिसाल है असम की हिमा दास.. एक गरीब परिवार में जन्मे लड़की ने खेतों में नंगे पैर दौड़ कर अथिलीट और फिर असम की डीएसपी बनने तक का रास्ता तय किया है.

हिमा दास का जन्म

हिमा दास का जन्म असम के नौगांव जिले के ढिगं गांव में 9 फरवरी सन 2000 में हुआ था. हिमा के घर कुल 16 सदस्य रहते थे जिनमें इनके पांच भाई और बहन है. इनके पिता पेशे से किसान थे जिनके पास केवल दो बीघा जमीन थी. इनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी. बचपन से ही हिमा को खेलों में रूचि थी और हिमा को पढ़ाई में कभी मन नहीं लगा. पढ़ाई में मन ना लगने के कारण उन्होंने खेल को प्राथमिकता दी. इन सब में उनके पिता ने उनका बहुत साथ दिया. बता दें हिमा दास के पहले कोच उनके पिता ही बने. वह कई सालों तक सुबह 4 बजे उठकर अपने धान के खेत में ही दौड़ने का अभ्यास किया करती थी.

खेत में ही खेलती थी फुटबॉल

आपको बता दें कि हिमा अपने पिता के साथ खेत में ही फुटबॉल खेला करती थी. उनके खेल में रुचि को देखकर एक दिन उनकी टीचर ने उन्हें दौड़ने की सलाह दी. हिमा दास ने उनकी टीचर की सलाह मानकर 100 और 200 मीटर की दौड़ में भाग लिया और गोल्ड मेडल जीता. बस यही से हिमा दास का एथलेटिक करियर शुरु हो चुका था.

कई सारे सम्मान से हो चुकी हैं सम्मानित

इतना ही नहीं हिमा दास के जज्बे और शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें कई सारे अवार्ड से सम्मानित भी किया जा चुका है जिसमें से एक था अर्जुन अवॉर्ड.. इसके साथ ही हाल ही में उन्हें असम पुलिस में डीएसपी पद पर नियुक्त किया गया है. इस अवसर पर हिमा दास ने कहा कि यह कोई बचपन का सपना सच होने जैसा है. क्योंकि वह बचपन से ही पुलिस अधिकारी बनना चाहती थी और असम पुलिस में सेवा कर अपनी मां का भी सपना पूरा करना चाहती थीं.