मौ’त के बाद भी नहीं छूटा साथ, पति का शव देखकर पत्नी ने भी त्यागे प्राण, एक साथ उठी 2 अर्थिंया तो रो पड़े लोग

इस दुनिया में पति पत्नी का रिश्ता बहुत ही अटूट और पवित्र माना जाता है ऐसा कहा जाता है पति पत्नी जीवन भर एक दूसरे का साथ निभाते हैं. जिंदगी में हर उतार-चढ़ाव में पति पत्नी एक दूसरे का सहारा बनते हैं. ऐसा भी कहा जाता है कि जब किसी की शादी होती है तो वह एक नहीं बल्कि 7 जन्मों के लिए मानी जाती है. शादी के बाद साथ जीने मरने की कसमें तो बहुत से लोग खाते हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसी घटना से रूबरू कराने जा रहे हैं जिसे सुनने के बाद आप आश्चर्यचकित रह जाएंगे.

आज हम आपको नागौर के मामले के बारे में बताएंगे.. जहां पर साथ में जीने मरने की कसमें खाने वाला यह दंपत्ति जोड़ा एक साथ ही दुनिया को अलविदा कह गया. प्यार की इस अनोखी दास्तां के गवाह नागौर के लोग बने.. इसे संयोग माना जाए या फिर सच्चा प्यार पर जिसने भी यह दृश्य देखा उनकी आंखों से आंसू छलक उठे..

वर्ष 1986 में आई फिल्म सदा सुहागन की वह लाइने जो नागौर में लोगों ने खुद अपनी आंखों से सच साबित होते हुए देखा और यह देखने के बाद उनकी आंखों से आंसू नहीं रुक पाए. बता दें कि यहां पर एक जोड़े ने 58 साल लंबा जीवन जीने के बाद एक साथ ही अपनी आखिरी सांसें ली. ऐसा बताया जा रहा है कि इस जोड़े ने एक साथ दुनिया को अलविदा कह दिया.

प्राप्त जानकारी के अनुसार 78 साल के राणाराम सेन रुण गांव के निवासी हैं.. ऐसा बताया जा रहा है कि उन्हें सांस से जुड़ी कुछ दिक्कत हुई थी इलाज के दौरान उन्हें पहले नागौर और फिर जोधपुर भेजा गया. परंतु जोधपुर में ही उनकी मृत्यु हो गई.. जिनके बाद उनके शव को घर ले आया गया. जब उनकी पत्नी भंवरी देवी ने अपने पति का शव देखा तो वह बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पाई.. ऐसा बताया जा रहा है कि पति का शव देखते ही पत्नी ने भी अपने प्राण त्याग दिए.

गांव के लोग इन्हें सौभाग्यशाली मान रहे हैं क्योंकि लाखों में कुछ भी जोड़े ऐसे होते हैं जो इतना लंबा दांपत्य जीवन जीने के बाद एक साथ दुनिया को अलविदा कहते हैं. आपको बता दें कि बैंड बाजे के साथ इनके अंतिम यात्रा निकाली गई और पूरा गांव उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुआ. इतना ही नहीं दोनों पति-पत्नी को एक ही चिता पर मुखाग्नि दी गई. फेरों के समय साथ जीने मरने की कसमें इस दंपत्ति ने साबित कर दिखाया. [Image: Google]