ज़िन्दगी से हार गई 20 महीने की नवजात शिशु, जातें-जाते 2 लोगों की आंखें कर‌ गई रोशन, बनी सबसे कम उम्र की डोनर

बच्चों को भगवान का अंश माना जाता है. एक मां तमाम तरह के दुख और दर्द सहकर अपने बच्चे को जन्म देती है इसलिए मां अपने बच्चों से बेहद प्यार करती है और अपने बच्चों को अपनी नजरों से दूर नहीं होने देते. आज हम आपको दिल्ली की रहने वाली घनिष्ठा के बारे में बताएंगे जिसने महज 20 महीने की उम्र में 5 लोगों की जिंदगी रोशन कर दी.

दरअसल घनिष्ठा अपने घर की बालकनी में खेल रही थी तभी अचानक उसका हाथ ग्रील पर से फिसला और वह पहली मंजिल से सीधा जमीन पर आ गिरी जिसके तुरंत बाद उसके माता-पिता ने उसे गंगाराम अस्पताल में भर्ती करवाया और उसका इलाज चला. लेकिन एक समय बाद डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिए. डॉक्टर ने उस मासूम बच्ची को आईसीयू में एडमिट किया था.

उस बच्ची की हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही थी फिर अचानक डॉक्टर ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया. ऐसा सुनने के बाद माता-पिता के ऊपर मानो जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. उनकी इकलौती संतान इस तरह उनसे दूर हो जाएगी उन्होंने यह कभी सपने में भी नहीं सोचा था.

घनिष्ठा के इस तरह अचानक चले जाने से उसके दुखी पिता आशीष ने बताया कि मेरी पत्नी बबीता ने अस्पताल में बहुत से मरीजों को तड़पते हुए देखा. फिर हमने इस मासूम बच्ची के अंगदान का निर्णय लिया निर्णय लेने से पहले हमारे काउंसलिंग भी हुई लेकिन हम लोगों ने पहले ही मन बना लिया था.

घनिष्ठा के दिल, लीवर, दोनों किडनी और कॉर्निया निकाल कर जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपित कर दिया गया यह नन्ही मासूम बच्ची मरते-मरते 5 लोगों की जिंदगी में उजाला कर‌ गई..