कोटा के इस धाम में मौजूद है 525 शिवलिंग, सिर्फ दर्शन मात्र से मिलते हैं 12 ज्योतिर्लिंग के फल

हिंदू धर्म में सावन महीने का एक विशेष महत्व होता है. सावन का महीना चल रहा है. सावन के महीने में जगह जगह भक्त भगवान शिव को खुश करने के लिए पूजा अर्चना और अभिषेक कर रहे हैं. सावन का पावन महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. इस महीने में हर कोई भगवान शिव को जल, दूध बेलपत्र अर्पण कर पूजा-अर्चना करता है.

इसी के तहत कोटा में एक ऐसा शिव मंदिर है जहां स्वास्तिक की रचना में पूरे 525 शिवलिंग स्थापित किए गए हैं जहां सावन के महीने में भक्तों की भीड़ लगी रहती है. कोटा के थेगड़ा इलाके में स्थित शिवपुरी धाम का भी अपना एक विशेष महत्व है. आपको बता दें कि मंदिर की स्थापना भी नेपाल के काठमांडू में स्थित भगवान पशुपतिनाथ के मंदिर से जुड़ी हुई है.

इस मंदिर के संरक्षक नागा साधु पूरी महाराज हैं जिनके गुरुदेव दिवगंत राणाराम पुरी महाराज ने मंदिर की 35 साल पहले कठिन युवक और साधना के बाद स्थापित की गई थी. सनातन पुरी महाराज का कहना है कि इस मंदिर में 525 शिवलिंग उपलब्ध है जिन को जोड़ने पर 12 आता है. यहां मात्र दर्शन और पूजा करने से श्रद्धालुओं को 12 ज्योतिर्लिंग का फल मिलता है.

सनातन पुरी महाराज बताते हैं कि दिवगंत नागा साधु राणाराम पुरी महाराज थेगड़ा में शिवपुरी धाम की जगह पर रहते थे. 90 के आसपास नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन के लिए गए. वहां भगवान शिव को अर्पण करने के लिए प्रसाद, बेलपत्र अगरबत्ती लेकर गए लेकिन मंदिर में नहीं ले जाने दिया गया, साथ ही हर मंदिर में एक ही मूर्ति थी जिससे दर्शन के लिए लंबी लाइन लगी हुई थी.

इसके चलते श्रद्धालुओं को चंद सेकेंड के दर्शन के लिए भगवान दिखाई देते. भक्त ठीक से अपनी मनोकामना भी नहीं मान सकते थे. ऐसे में नागा साधु ने तय किया कि ऐसा धाम बनाएंगे जहां महाशिवरात्रि और सावन के सोमवार को एक साथ लाखों लोग पूजा कर सकेंगे. शिवपुरी धाम में पहले केवल प्राचीन छोटा मंदिर हुआ करता था.

इसके बारे में बताया जाता है कि वह 500 से 1000 साल पुराना है. साल 1986 में उन्होंने राज परिवार से जमीन लेकर 525 शिवलिंग की स्थापना की. पशुपतिनाथ जी के गुजर जाने के बाद इस मंदिर की सारी जिम्मेदारी सनातन पुरी महाराज के ऊपर आ गई.